हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , शेख अहमद कनानी ने बुधवार शाम को खार्ग विशेष खंड की प्रशासनिक परिषद की दूसरी बैठक में शहीद इमाम खुमैनी र.ह.की याद को सम्मानित करते हुए और इस्लामी क्रांति के आदर्शों के अनुपालन पर जोर देते हुए कहा,जो लोग ईमानदारी के साथ ईश्वर के मार्ग, पैगंबर (स.ल.) की शिक्षाओं और आशूरा आंदोलन पर चलते हैं, उन्हें बलिदान और कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए, और 'शहीद इमाम' ने अपने व्यवहार और चरित्र से दिखाया कि वे इस्लामी पैगंबर (स.ल. और अहले-बैत (अ.स.) के सच्चे अनुयायी थे।
उन्होंने आगे कहा,शहीद इमाम वह नेता थे जिन्होंने अपने और अपने परिवार को अपनी आस्था, जनता और इस्लामी मातृभूमि के मार्ग पर बलिदान कर दिया, और यह जीवनशैली उन सभी के लिए एक स्थायी आदर्श है जो अहले-बैत (अ.स.) के अनुयायी होने का दावा करते हैं।
खार्ग के सुन्नी इमाम ए जुमआ ने न्यायपालिका सप्ताह का संदर्भ देते हुए न्यायाधीशों और देश के न्यायिक तंत्र के प्रयासों की सराहना की और कहा,न्याय हर समाज की सबसे महत्वपूर्ण मांग और हर शासन की मजबूती का आधार है हम आशा करते हैं कि न्यायिक अधिकारी इसी भावना के साथ जनता की सेवा में सफल रहेंगे।
शेख कनानी ने सशस्त्र बलों, इस्लामिक क्रांति रक्षक कोर, सेना, पुलिस और देश की सुरक्षा के सभी रक्षकों की सराहना करते हुए कहा,आज सैन्य और पुलिस बल वैश्विक अहंकारी शक्तियों के सामने दृढ़ता से खड़े होकर देश की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा कर रहे हैं, और जनता ने हमेशा साबित किया है कि वे इस्लामी ईरान की रक्षा में किसी भी बलिदान के लिए तैयार हैं।
उन्होंने आगामी चुनावों को जनता की उपस्थिति के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बताया और स्पष्ट किया,चुनावों में जनता की भागीदारी जितनी अधिक उत्साहपूर्ण होगी, ईरानी राष्ट्र की शक्ति, एकता और अखंडता का संदेश उतनी ही मजबूती से दुश्मनों तक पहुंचेगा, और ईरान की जागरूक जनता ने हमेशा दिखाया है कि वह निर्णायक मौकों पर जिम्मेदार और सचेत उपस्थिति दर्ज कराती है।
अंत में उन्होने कहां,इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के प्रति पुनः निष्ठा व्यक्त करते हुए नेतृत्व के समर्थन और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने पर जोर दिया और याद दिलाया,आज देश अपने सबसे संवेदनशील ऐतिहासिक दौर में से एक से गुजर रहा है, और सर्वोच्च नेता के बुद्धिमान मार्गदर्शन, जनता की दूरदर्शिता और अधिकारियों की सहमति से दुश्मन कभी भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाएंगा और इस्लामी गणराज्य व्यवस्था गरिमा के साथ अपनी प्रगति का मार्ग जारी रखेगी।
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